विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त को क्यों मनाया जाता हैं ? उनका मूल धर्म क्या है ? जानिए

8 August 2023

🚩विश्व आदिवासी दिवस आबादी के अधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी सुरक्षा के लिए प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को विश्व के आदिवासी लोगों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। यह घटना उन उपलब्धियों और योगदानों को भी स्वीकार करती है जो मूलनिवासी लोग पर्यावरण संरक्षण जैसे विश्व के मुद्दों को बेहतर बनाने के लिए करते हैं।

 

🚩अंग्रेजी का नेटिव (native) शब्द मूल निवासियों के लिये प्रयुक्त होता है। अंग्रेजी के ट्राइबल (tribal) शब्द का अर्थ ‘मूलनिवासी’ नहीं होता है। ट्राइबल का अर्थ होता है ‘जनजातीय’। 9 अगस्त को ‘विश्व जनजातीय दिवस’ मनाया जाता है। ‘विश्व जनजातीय दिवस’ अर्थात विश्व की सभी जनजातीयों का दिवस। जनजाती को आदिवासी भी कहते हैं। आदिवासी अर्थात जो प्रारंभ से यहां रहता आया है। आओ जानते हैं,भारत के आदिवासियों की कुछ रोचक बातें।

 

🚩जनजाति अर्थात आदिवासी।भारत में लगभग 461 जनजातियां हैं। वे सभी आदिवासियों का धर्म हिन्दू ही है। आदिवासी समाज की सभी जातिया हिन्दू धर्म का पालन करती है।

 

🚩करीब 400 पीढ़ियों पूर्व सभी भारतीय वन में ही रहते थे और वे आदिवासी थे, परंतु विकासक्रम के चलते पहले ग्राम बने फिर कस्बे और अंत में नगर। यही से विभाजन होना प्रारंभ हुआ। जो वन में रह गए वे वनवासी, जो गांव में रह गए वे ग्रामवासी और जो नगर में चले गए वे नगरवासी कहलाने लगे।

 

🚩मूल रूप से आदिवासियों का अपना धर्म है। ये शिव एवं भैरव के साथ ही प्रकृति पूजक हैं और जंगल, पहाड़, नदियों एवं सूर्य की आराधना करते हैं। इनके अपने अलग लोक देवता, ग्राम देवता और कुल देवता हैं। जैसे नागवंशी आदिवासी और उनकी उप जनजातियां नाग की पूजा करते हैं। सिंधु घाटी की सभ्यता में शिव जैसी पशुओं से घिरी जो मूर्ति मिली है इससे यह सिद्ध होता है कि आदिवासियों का संबंध सिंधु घाटी की सभ्यता से भी था।

 

🚩आदिवासी समाज की सभी जातिया हिन्दू धर्म का पालन करती है।

 

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