सिंधी समाज मरख बादशाह के आतंक से झुके नहीं, ऐसे किया उसका अंत

10 April 2024

 

सनातनी हिन्दू आक्रमणकारियों से हमेंशा प्रताड़ित किया गया है पर समय समय पर उनको करारा जवाब भी दिया है, आज भी हिंदुओं के खिलाफ अनेक षडयंत्र रचे जा रहे हैं पर हिंदुओं को जैसे उत्तर देना चाहिए वे सिंधी भाइयों ने युक्ति बताई है, आपदा समय में ये भी युक्ति अपनानी चाहिए।

 

सिंध समाज पर एक ऐसी विकट आपदा आ पड़ी

 

आपको बता दें कि सिंध स्थित हिन्दुओं को जबरदस्ती मुसलमान बनाने हेतु वहाँ के नवाब मरखशाह ने फरमान जारी किया । उसका जवाब देने के लिए हिन्दुओं ने आठ दिन की मोहलत माँगी । अपने धर्म की रक्षा हेतु हिन्दुओं ने सृष्टिकर्त्ता भगवान की शरण ग्रहण की तथा ‘कार्यं साधयामि वा देहं पातयामि…’ अर्थात् ‘या तो अपना कार्य सिद्ध करेंगे अथवा मर जायेंगे’ के निश्चय के साथ हिन्दुओं का अपार जनसमूह सागर तट पर उमड़ पड़ा । सब तीन दिन तक भूख-प्यास सहते हुए प्रार्थना करते रहे।

 

आये हुए सभी लोग किनारे पर एकटक देखते-देखते पुकारते- ‘हे सर्वेश्वर ! तुम अब रक्षा करो। मरख बादशाह तो धर्मांध है और उसका मूर्ख वजीर ‘आहा’, दोनों तुले हैं कि हिन्दू धर्म को नष्ट करना है। लेकिन प्रभु ! हिन्दू धर्म नष्ट हो जायेगा तो अवतार बंद हो जायेंगे। मानवता की महानता उजागर करने वाले रीति रिवाज सब चले जायेंगे। आप ही धर्म की रक्षा के लिए युग-युग में अवतरित होते हो। किसी भी रूप में अवतरित होकर प्रभु हमारी रक्षा करो। रक्षमाम् ! रक्षमाम् !! तब अथाह सागर में से प्रकाशपुंज प्रगट हुआ । उस प्रकाशपुंज में निराकार परमात्मा अपना साकार रूप प्रगट करते हुए बोले : ‘‘हिन्दू भक्तजनों ! तुम सभी अब अपने घर लौट जाओ । तुम्हारा संकट दूर हो इसके लिए मैं शीघ्र ही नसरपुर में अवतरित हो रहा हूँ । फिर मैं सभी को धर्म की सच्ची राह दिखाऊँगा ।’’

 

सप्ताह भर के अंदर ही संवत् 1117 के चैत्र शुक्ल पक्ष की द्वितीया को नसरपुर में ठक्कर रत्नराय के यहाँ माता देवकी के गर्भ से भगवान झूलेलाल ने अवतार लिया और हिन्दू जनता को दुष्ट मरख के आतंक से मुक्त किया । उन्हीं भगवान झूलेलाल का अवतरण दिवस ‘चेटीचंड’ के रूप में मनाया जाता है ।

 

प्रार्थना से सबकुछ संभव है। सिंधी भाइयों की सामुहिक पुकार पर हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए झूलेलाल जी का अवतरण, मद्रास के भीषण अकाल में श्री राजगोपालाचार्य द्वारा करायी गयी सामूहिक प्रार्थना के फलस्वरूप मूसलधार वर्षा होने लगी।

 

किसी ने सही कहा है…. ” जब और सहारे छिन जाते, न किनारा मिलता है । तूफान में टूटी किश्ती का, भगवान सहारा होता है ।”

 

झूलेलाल जी का वरुण अवतार यह खबर देता है कि कोई तुम्हारे को धनबल, सत्ताबल अथवा डंडे के बल से अपने धर्म से गिराना चाहता हो तो आप ‘धड़ दीजिये धर्म न छोड़िये।’ सिर देना लेकिन धर्म नहीं छोड़ना।

 

चेटीचंड महोत्सव मानव – जाति को संदेश देता है कि क्रूर व्यक्तियों से दबो नहीं , डरो नहीं , अपने अंतरात्मा परमात्मा की सत्ता को जागृत करो ।

 

सिंधी भाई जुल्मी आतताईयों के आगे झुके नहीं वरन धर्म का आश्रय लेकर उन्होंने अपनी अंतर चेतना का भगवान झूलेलालजी के रूप में अवतरण करा दिया । इसलिए यह उत्सव हमें पुरुषार्थी और साहसी बनकर अपने धर्म में अडीग रहने रहने की प्रेरणा देता हैं।

 

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