पाकिस्तान से आए CAA के तहत नागरिकता पाने वालों ने सुनाई आपबीती

पाकिस्तान से आए CAA के तहत नागरिकता पाने वालों ने सुनाई आपबीती

21 May 2024 <div class=”separator” style=”clear: both;”><a href=”https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg84NksJ-akNCUsuyrDZ3-t7EUjVKHjuQ-2ciSerQXYJkjXfzQr4ngMBO79PdH11rlLbvCbpP0WivlvaB1m7PZM004wNa7Ta2j1N9OXCcm41LSxFg5LNmSNaj6uCh6KybJMgtcnki8dvlEr6mCR9eqqMepR1yyCH4xUjfQm5Wp3Q5XoI3r7e6IhWHdh7s8/s1280/IMG-20240520-WA0015.jpg” style=”display: block; padding: 1em 0; text-align: center; clear: right; float: right;”><img alt=”” border=”0″ width=”400″ data-original-height=”1280″ data-original-width=”1280″ src=”https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg84NksJ-akNCUsuyrDZ3-t7EUjVKHjuQ-2ciSerQXYJkjXfzQr4ngMBO79PdH11rlLbvCbpP0WivlvaB1m7PZM004wNa7Ta2j1N9OXCcm41LSxFg5LNmSNaj6uCh6KybJMgtcnki8dvlEr6mCR9eqqMepR1yyCH4xUjfQm5Wp3Q5XoI3r7e6IhWHdh7s8/s400/IMG-20240520-WA0015.jpg”/></a></div>

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भारत सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून CAA (सीएए) के तहत एक साथ 350 लोगों को भारत की नागरिकता दे दी है। इनमें से 14 लोगों को गृह मंत्रालय ने बुलाकर नागरिकता के पत्र सौंपे, तो बाकियों को सारे कागजात ऑनलाइन उपलब्ध कराए गए। भारत की नागरिकता पाए लोगों में अधिकाँश लोग पाकिस्तान से आए हिंदू अल्पसंख्यक हैं, जो अपनी जान बचाकर पाकिस्तान से भारत आए थे।

दिल्ली के आदर्श नगर में रह रहीं भावना ने कहा, “वहाँ हमें बहुत मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं। लड़कियाँ पढ़ नहीं सकतीं और घरों से बाहर निकलना मुश्किल होता है। मुस्लिम हिंदू लड़कियों को किडनैप कर लेते हैं और उन्हें जबरन इस्लाम कबूल करवाया जाता है। लड़कियों को इतना खौफ रहता है कि वे घरों से बाहर नहीं निकलतीं। मैं काफी छोटी थी, तब से ही यहाँ हूँ। मुझे तो पाकिस्तान के अपने घर के अलावा ज्यादा कुछ याद नहीं है। इसकी वजह यह थी कि घर से बाहर ही नहीं निकलते थे। अब भी हमारे तमाम रिश्तेदार वहाँ हैं, जो भारत आना चाहते हैं। लेकिन उन्हें वीजा पाने में मुश्किल हो रही है।”पाकिस्तान से उत्पीड़न का शिकार होकर आए हिंदू परिवार की बेटी ने कहा कि हम अपने देश में लौटकर खुश हैं।

भावना ने कहा कि ‘मैं एक टीचर बनना चाहती हूं और यहाँ की महिलाओं को पढ़ाना चाहती हूँ।’

दिल्ली के मजनूँ का टीला में रहने वाली मीरा को भी भारत की नागरिकता मिल गई है। सीएए के माध्यम से नागरिकता मिलने के बाद मीरा ने कहा, “हमने 3-4 साल पहले नागरिकता के लिए आवेदन किया था। हमें आए हुए 8-9 साल हो गए थे जब यह घोषणा की गई थी कि हमें नागरिकता मिलेगी। हमने अपनी पोती का नाम भी ‘नागरिकता’ रखा है। कल जब हमें नागरिकता मिली तो हमने भगवान कृष्ण को मिठाइयाँ अर्पित कीं और विशेष भोजन तैयार किया।”

दिल्ली में रहने वाले शीतल दास 5 अक्टूबर 2013 को पाकिस्तान छोड़कर दिल्ली पहुँचे थे। तब से वो यहीं पर हैं। शीतल दास ने कहा, “हमने पिछले महीने ही नागरिकता के लिए अप्लाई किया था और 15 मई को हमें नागरिकता मिल गई। अब हम सामान्य जीवन जी सकेंगे। काम कर सकेंगे और बच्चों को पढ़ा लिखा सकेंगे। अब हमारे बच्चों का भविष्य भी सुधर जाएगा।”

यशोधरा नाम की महिला ने कहा, “हम 2013 में आए, लेकिन हमारे पास पानी और बिजली की सुविधा तक नहीं थी। हमनें नागरिकता के लिए काफी कोशिश की, लेकिन अब जाकर मिली है। हमारा तो जो हुआ, वो हुआ, हमारे बच्चों का भविष्य संवर जाएगा। हम बहुत खुश हैं। प्रधानमंत्री को बहुत शुक्रिया, अब हमारे बच्चे भी पढ़ लिख पाएँगे और अपना भविष्य संवार पाएँगे। हम पाकिस्तानी कहे जाते थे, लेकिन अब हमें कोई पाकिस्तानी नहीं कहेगा। अब हम हिंदुस्तानी हो गए हैं।”

अमृता नाम की बच्ची ने कहा, “हम 2013 में पाकिस्तान से आए थे। न बिजली की सुविधा थी और न ही स्कूल की। अब दोनों सुविधाएँ मिलेंगी। मैं बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती हूँ।”

गौरतलब है कि भारत सरकार ने नागरिकता संसोधन विधेयक को 2019 में ही पारित कर दिया था और इस साल मार्च से इसे कानून के तौर पर लागू कर दिया। सीएए के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर आए अल्पसंख्यकों को नागरिकता दी जानी है। इन अल्पसंख्यकों में हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोग हैं। सरकार ने इस साल मार्च में इस कानून को लागू करते समय इसके प्रावधानों के बारे में भी बताया था।

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