भारत में ये वृक्ष लगा दिए तो प्रदूषण से हो जाएंगे मुक्त, बीमारियां भागने लगेगी

भारत में ये वृक्ष लगा दिए तो प्रदूषण से हो जाएंगे मुक्त, बीमारियां भागने लगेगी

6 June 2024

Home

मनुष्य भोजन केवल 1 किलोग्राम के आसपास करता होगा लेकिन वायु 12 से 13 लीटर ग्रहण करता हैं। इसलिए वातावरण शुद्ध होना चाहिए जिससे शुद्ध हवा मिलने पर बीमारियां नही होगी ।

चन्द छोटी-छोटी सावधानियां रखेंगे और कुछ सरलतम कदग , पर बडे खास और ठोस असरदार कदम यदि हम सब मिलकर उठाएंगे तो न सिर्फ भारत बीमारीयों से मुक्त होगा , बल्कि पर्यावरण प्रदूषण की समस्या भी समूल नष्ट हो जाएगी ।

धरती पर से पेड़-पौधे काटने पर पर्यावरण प्रदूषण की समस्या हुई जिस पर सन् 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा स्टॉक होम (स्वीडन) में विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया गया था । जिसमें 119 देशों ने भाग लिया और पहली बार पृथ्वी भर का एक ही सिद्धांत मान्य किया गया।

इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का जन्म हुआ तथा प्रति वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस आयोजित करके नागरिकों को प्रदूषण की समस्या से अवगत कराने का निश्चय किया गया तथा इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाते हुए राजनैतिक चेतना जाग्रत करना और आम जनता को प्रेरित करना था। तभी से 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाया जाने लगा।

तो आइए इसी कड़ी में एक और बात जोड़ते हुए इस संबंध में चर्चा को आगे बढाते हैं…

हमारे देश के प्रधानमंत्री जी आत्मनिर्भर भारत की बात अक्सर बोलते हैं। हमारे देश को अगर आत्म निर्भर करना है तो सबसे पहले हमें स्वदेशी पारम्परिक जड़ी बूटियों की पहचान करनी होगी । तुलसी, पीपल, नीम, गिलोय आदि कुदरती वृक्षों और पौधों को लगाना होगा और उसकी औषधियां अधिक मात्रा में तैयार करके प्रचलन में लानी होगी।
जिससे हमारे देश में अरबो-खरबो रुपये की अंग्रेजी दवाइयाँ आना कम /बंद होगा और हमारी आयुर्वेदिक दवाइयाँ विदेशों में निर्यात होंगी तो आमदनी बढ़ेगी जिससे देश आत्मनिर्भर बनेगा।

मनुष्य सोचता था , कि हमारा ही अधिकार है पृथ्वी पर और जल तथा वायु को प्रदूषित करता गया । इसका परिणाम खुद मनुष्य ही भुगत रहा है कई शहरों में जहरीली हवा हो गई और भयंकर बीमारियां आई ।

कोरोना काल मे ऑक्सीजन की कमी पड़ गई, ऑक्सीजन की कमी के कारण कइयों की मृत्यु भी हो गई। अब हमें वैचारिक प्रदूषण मिटाना होगा और “जिओ ओर जीने दो” ये मंत्र साकार करना होगा, अब हमें अधिक से अधिक वृक्षों को लगाना होगा।

गौरतलब है… सरकार द्वारा पिछले 70 सालों में पीपल, बरगद (वटवृक्ष) आंवला और नीम के पेडों को सरकारी स्तर पर लगाना लगभग बंद कर दिया गया है!
सरकार ने इन पेड़ो से दूरी बना ली तथा इसके बदले विदेशी यूकेलिप्टस को लगाना शुरू कर दिया जो जमीन को जल विहीन और वातावरण को प्रदूषित कर देता है।

आज हर जगह यूकेलिप्टस, गुलमोहर और अन्य सजावटी पेड़ों ने ले ली है। अब जब वायुमण्डल में रिफ्रेशर ( अच्छी गुणवत्तापूर्ण और आक्सीजन देने वाले वृक्ष) ही नही रहेगा तो गर्मी तो बढ़ेगी ही और जब गर्मी बढ़ेगी तो जल भाप बनकर उड़ेगा ही और इनकी हवा से हवामान भी प्रदूषित होगा।

नीलगिरी के वृक्ष भूल से भी न लगाए जाएं, ये जमीन को बंजर बना देते हैं। जिस भूमि पर ये लगाये जाते हैं उसकी शुद्धि 12 वर्ष बाद होती है, ऐसा माना जाता है। इसकी शाखाओं पर ज्यादातर पक्षी घोंसला नहीं बनाते । इसके मूल में प्रायः कोई प्राणी बिल नहीं बनाते । यह इतना हानिकारक, जीवन-विघातक वृक्ष है।

जबकि पीपल कार्बन डाई ऑक्साइड का 100% अवशोषण करता है, बरगद 80% और नीम 75% करता है।

बता दें…कि पीपल के पत्ते का फलक बड़ा और डंठल पतला होता है जिसकी वजह से शांत मौसम में भी पत्ते हिलते रहते हैं और स्वच्छ ऑक्सीजन देते रहते हैं। पीपल को वृक्षों का राजा कहते है, श्री कृष्ण ने इसे अपनी विभूति भी बताया है भगवद्गीता में… “अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां” (गीता १०.२६ )

पीपल का वृक्ष दमानाशक, हृदयपोषक, ऋण-आयनों का खजाना, रोगनाशक, आह्लाद व मानसिक प्रसन्नता का खजाना तथा रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ानेवाला है। बुद्धू बालकों तथा हताश-निराश लोगों को भी पीपल के स्पर्श एवं उसकी छाया में बैठने से अमिट स्वास्थ्य-लाभ व पुण्य-लाभ होता है। पीपल की जितनी महिमा गाएं, उतनी कम है।

इन जीवनदायी पेड़ों को ज्यादा से ज्यादा लगायें तथा यूकेलिप्टस आदि सजावटी पेड़ों को न लगाएं व सरकार द्वारा भी इन पर प्रतिबंध लगाया जाये।

दूसरी बात की केमिकल युक्त खेती हो रही है उसकी जगह परम्परागत जैविक खेती करनी होगी इससे पर्यावरण भी शुद्ध होगा और शुद्ध अन्न मिलने पर लोगों का स्वास्थ्य भी स्वतः बढ़िया होगा और लोग बीमार भी कम होंगे।

हर 500 मीटर की दूरी पर एक पीपल का पेड़ लगाये तो आने वाले कुछ सालों में प्रदूषण मुक्त भारत होगा ही होगा । फिर यूँ बेवजह ऑक्सीजन के प्लांट लगाने की आवश्यकता नही पड़ेगी।

एक उपाय ये भी है कि बड़, पीपल, नीम आदि के बीज मिट्टी में लपेट कर छोटी-छोटी बहुत सारी बॉल बना कर सूखा लें जब बारिश के दिनों में ट्रेन यात्रा करें तो खिड़की में से पटरी से दूर 20-30 फिट की दूरी पर जगह-जगह खाली स्थानों पर फेंकते जाए। बारिश में ये बीज अंकुरित हो जाएंगे आपकी ओर से बहुत बड़ी पर्यावरण शुद्धि की सेवा हो जाएगी।

कुछ लोग सिर्फ दिखावा करने के लिए पेड लगाते हैं और कोई भी पेड़ लगा देते है लेकिन बदलाव तो वास्तविक लाना है । तो इस बार हमें कम से कम 5 पेड़ लगाने होंगे और वो भी पीपल, बरगद, नीम, बिल्व अथवा तुलसी के ही लगाने होंगें और उसकी देखभाल भी करनी होगी तभी पर्यावरण प्रदूषण मुक्त होगा।

ध्यान दें बारिश का समय आने वाला है । सभी पर्यवरण प्रेमी कम से कम 5 पेड़ पीपल, बड़, तुलसी , बिल्व या नीम के अवश्य लगाएं एव॔ उसकी देखभाल भी करें।

“अपना श्रृंगार तो किया कई बार,
आओं करे मां भारती का श्रृंगार ।
धरती मां को पहनाये वृक्षों का सुंदर हार।।”

Follow on

Facebook

https://www.facebook.com/SvatantraBharatOfficial/

Instagram:

http://instagram.com/AzaadBharatOrg

Twitter:

twitter.com/AzaadBharatOrg

Telegram:

https://t.me/ojasvihindustan

http://youtube.com/AzaadBharatOrg

Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Leave a Reply

Translate »