गौमांस खाना छोड़ा तो मृत्यु की दर 2.4 % घट जाएगी – वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम

18 जनवरी  2019
www.azaadbharat.org
दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है, जहां सबसे ज्यादा शाकाहारी लोग रहते हैं । इसकी एक वजह हमारे शास्त्र द्वारा इसकी सहमति ना देना है । क्योंकि मांस खाना इंसान के शरीर के लिए नुकसानदेय है । वहीं कुछ वैज्ञानिक कारण भी हैं जो बताते हैं कि शरीर के लिए मांसाहार भयानक बुरा है ।
वर्ल्‍ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) ने लोगों को गौमांस छोड़ने की सलाह दी है । उसका कहना है कि इससे न सिर्फ करोड़ों लोगों की जान बचेगी बल्कि ग्रीन हाउस गैस (Green House) उत्‍सर्जन में भी कमी आएगी । फोरम ने यह दावा एक अध्‍ययन के आधार पर किया है । WEF के लिए ऑक्‍सफोर्ड मार्टिन स्‍कूल (Oxford Martin School) ने यह अध्‍ययन कराया था । फोरम का कहना है कि बीन्‍स (फलियां), माइकोप्रोटीन और मटर (Peas) में कहीं अधिक सेहत में सुधार लाने वाले तत्‍व हैं । लाइवस्‍टॉक फार्मिंग से धरती को खतरा बढ़ रहा है ।
5% मौतें हो जाएंगी कम :-
अध्‍ययन में यह बात सामने आई कि मांस खासकर गौमांस छोड़ने से लोगों की सेहत और पर्यावरण दोनों में सुधार होगा । फोरम का कहना है कि वैश्विक स्‍तर पर जो मौतें हो रही हैं उसका बहुत बड़ा कारण गौमांस का सेवन है । अगर गौमांस का सेवन बंद कर दिया जाए तो इससे वैश्विक स्‍तर पर 2.4% मौतें रुकेंगी । वहीं धनी देशों में, जहां इसे खाने का चलन ज्‍यादा है, करीब 5% मौतें रुकेंगी । अध्‍ययन में गौमांस के बजाय ऐसा आहार लेने की बात कही गई है, जिसमें पर्याप्त प्रोटीन मौजूद हों ।
धनी देशों में ज्‍यादा खाया जाता है गौमांस:-
टाइम्‍स ऑफ इंडिया की समाचार के अनुसार, अध्‍ययन में उन धनी देशों के लोगों को शामिल किया गया, जहां गौमांस की खपत ज्‍यादा है । वहां फाइबर युक्‍त भोजन लेने की वकालत की गई है । हालांकि अध्‍ययन में गौमांस खाने से होने वाली मौतों का आंकड़ा नहीं दिया गया है । यह भी साफ नहीं हो पाया है कि गौमांस खाने से दरअसल कौन सी बीमारी होती है । लेकिन WEF का दावा है कि इसे छोड़ने से करोड़ों जानें बचेंगी ।
दूसरे आहार पर ध्यान देना जरूरी:-
WEF ने इस बात से भी खबरदार किया है कि 2050 तक दुनिया की जनसंख्या 10 अरब के आसपास पहुंच जाएगी । इससे वैश्विक स्‍तर पर गौमांस की खपत और बढ़ेगी । फोरम के मैनेजिंग डायरेक्‍टर डॉमिनिक वाघ्रे ने कहा कि उस समय गौमांस की मांग पूरी कर पाना आसान नहीं होगा । उन्‍होंने कहा कि गौमांस, चिकन और पॉर्क के स्‍थान पर दूसरी डाइट के बारे में योजना बनानी होगी, जिससे वैश्विक स्‍तर पर लोगों की सेहत में सुधार हो सके । स्त्रोत : जी बीजनेस
एक शोध में 10 यूरोपीय देशों के पांच लाख लोगों ने हिस्सा लिया । इस दौरान उनके खान पान का हिसाब रखा गया और कैंसर, दिल की बीमारियों व डायबिटीज पर भी नजर रखी गई । शोध का निचोड़ यह निकला कि मीट खाने वालों की जल्दी मरने की संभावना अधिक होती है ।
नॉनवेज खाने वालों पर फेल हो रहीं एंटीबायोटिक दवाएं :-
माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. शीतल वर्मा ने बताया कि लोग आजकल मीट-मछली व चिकन बहुत चाव से खा रहे हैं मगर पशुपालक कमाई के लालच में मुर्गा-मुर्गी व अन्य जानवरों को तंदुरुस्त बनाने के लिए एंटीबायोटिक समेत दूसरी दवा दे रहे हैं और इंजेक्शन लगा रहे हैं । इंजेक्शन व दवा जानवरों के खून में जाकर उनके आकार व वजन में तेजी से इजाफा कर रही हैं।
डॉ. शीतल वर्मा के अनुसार इसका असर मनुष्य पर पड़ रहा है । लोगों में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो रही है । इसके दुष्प्रभाव के कारण जब मरीज को जरूरत पड़ने पर एंटीबायोटिक दी जाती है तो वह असर नहीं करती । डॉक्टर एक के बाद एक एंटीबायोटिक दवा बदलते रहते हैं लेकिन मरीज को फायदा नहीं होता ।
शास्त्रों के अनुसार मांसाहार:-
श्रीमद् भगवत गीता के अनुसार, मांसाहार खाना राक्षसी गुण है । मांस और शराब का सेवन करना तामसिक भोजन कहलाता है। इस तरह का भोजन करने वाले लोग पापी, कुकर्मी, दुखी, आलसी और रोगी हैं ।
महाभारत में कहा गया है कि कोई शख्स अगर 100 अश्वमेध यज्ञ करता है और वहीं दूसरा शख्स पूरी जिंदगी मांस को हाथ नहीं लगाता है, तो दोनों में से बिना मांस खाने वाले शख्स को सबसे ज्यादा पुण्य मिलता है ।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण में मांसाहार
मांस खाने वाले ज्यादातर लोगों चिड़चिड़ापन और ज्यादा गुस्सा होते है और शरीर व मन दोनों अस्वस्थ बन जाते हैं । गंभीर बीमारियों की चपेट में ज्यादा आते हैं । इन बीमारियों में हाई ब्लड प्रशेर, डायबिटिज, दिल की बीमारी, कैंसर, गुर्दे का रोग, गठिया और अल्सर शामिल हैं ।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार मांसाहार का सेवन करना हमारे शरीर के लिए उतना ही नुकसानदायक होता है जितना कि धूम्रपान असर करता है । इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पका हुआ मांस खाने से कैंसर का खतरा बना रहता है ।
दुनिया के एक चौथाई प्रदूषण का कारण मांस है । अगर दुनिया के लोग मांस खाना छोड़ दें तो 70 प्रतिशत तक प्रदूषण कम हो जाएगा ।
मांसाहार की तुलना में शाकाहारी भोजन सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है । शाकाहारी भोजन करने से इंसान स्वस्थ, दीर्घायु, निरोग और तंदरुस्त बनाता है ।
Official Azaad Bharat Links:
Word Press : https://goo.gl/ayGpTG

5 thoughts on “गौमांस खाना छोड़ा तो मृत्यु की दर 2.4 % घट जाएगी – वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम

  1. Bahut bada durbhagya hai un logon ka jo Gau-Hatyare ya Gau-Maas-Bhakshak bane bethe hain.
    Gau-Maata ke kalyanmai-Mahima ko shigrah pahachan le to bach sakte hain.

  2. यह बात सबको पता लगनी चाहिए जो गौमांस खाते हैं

  3. जो लोग गौ मांस खाते हैं उन्हें पता होनी चाहिए

  4. आज तक हमें गलत जानकारी के तहत कहा गया की मासाहार करना स्वास्थवर्धक है किन्तु सत्य तो ये है की मासाहारी व्यक्ति की आयु क्षीण होती जाती है !

  5. मानव जीवन पूर्णतः शुध्द शाकाहारी होना चाहिए।

Comments are closed.

Translate »