बर्फ में दबी कहानी: रूपकुंड झील का रहस्य और हिमालय की मौन गाथा

05 January 2026

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🌁रूपकुंड झील — बर्फ में छिपे सैकड़ों कंकालों का रहस्य 🏔️💀

हिमालय की गोद में छिपी एक झील, जो जितनी सुंदर है, उतनी ही रहस्यमयी भी। रूपकुंड झील (Roopkund Lake) , जिसे आम बोलचाल में कंकाल झील (Skeleton Lake) कहा जाता है।
🔅उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है।
🔅समुद्र तल से लगभग 5,029 मीटर (16,499 फीट) की ऊँचाई पर स्थित यह छोटा-सा हिमनद है।
🔅यह हिमनद जब गर्मियों में पिघलता है, तो इसके तल में सैकड़ों मानव कंकाल दिखाई देते हैं , जो इसे दुनिया की सबसे रहस्यमयी झीलों में से एक बनाता है।

🗺️भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक सौंदर्य
🔅स्थान: उत्तराखंड का चमोली जिला, त्रिशूल और नंदा घुंटी चोटियों के बीच।
🔅ऊँचाई: लगभग 5,029 मीटर (16,499 फीट)।
🔅प्रसिद्ध नाम: रूपकुंड झील, कंकाल झील, रहस्यमयी झील।
यह झील घने बादलों, बर्फ से ढकी चोटियों और सुंदर बुग्यालों (घास के मैदानों) से घिरी हुई है। ट्रेकिंग मार्ग पर आने वाले बेदनी बुग्याल और कालू विनायक मंदिर जैसे स्थलों से होकर जाने वाला रास्ता अत्यंत मनमोहक है, जो हर रोमांच प्रेमी का सपना होता है।

☠️कंकालों की खोज और रहस्य की शुरुआत

सन् 1942 में ब्रिटिश काल में वन अधिकारी एच.के. मधवाल ने इस झील की खोज की।
जब बर्फ पिघली, तो हजारों वर्षों पुराने मानव और घोड़ों के कंकाल दिखाई दिए — कुछ के सिरों में चोट के निशान थे, जैसे किसी भारी वस्तु से मारे गए हों। शुरुआत में लोगों ने यह समझा कि ये सैनिक थे, लेकिन बाद के अध्ययनों में कई विभिन्न प्रजातियों (भारतीय, यूरोपीय आदि) के अवशेष मिले। जनजातीय पहचान, पहनावे के अवशेषों और DNA परीक्षणों से पता चला कि ये लोग विभिन्न कालखंडों के हैं और एक ही घटना में नहीं मरे।

🚩पौराणिक कथा: राजा जसधवल और देवी नंदा देवी
स्थानीय किंवदंती के अनुसार — रूपकुंड झील का संबंध राजा जसधवल और रानी बलम्पा से है। कथाओं के अनुसार, राजा-रानी नंदा देवी की यात्रा पर निकले थे, परंतु उन्होंने देवी के नियमों का अनादर कर दिया। देवी के कोप से उन पर भयंकर ओलावृष्टि हुई और पूरा दल वहीं मौत की नींद सो गया। कहा जाता है कि झील के तल में आज भी उन्हीं के कंकाल पड़े हैं जो देवी की शक्ति का प्रमाण देते हैं।

🚩वैज्ञानिक जांच और आधुनिक सिद्धांत
समय के साथ वैज्ञानिकों ने झील पर कई अध्ययन किए।
2019 में हुए नवीनतम DNA विश्लेषणों से पता चला कि झील में पाए जाने वाले कंकाल लगभग 1,000 साल पुराने हैं, और दो मुख्य समूहों के लोग वहाँ मरे थे — एक दक्षिण एशियाई और दूसरा भूमध्यसागरीय क्षेत्र से आया हुआ (संभवतः विदेशी व्यापारी या तीर्थयात्री समूह)।
✴️मृत्यु के कारणों में प्रमुख संभावनाएँ हैं —
🔅तीव्र ओलावृष्टि से सिर में घातक चोटें।
🔅हिमस्खलन या भूस्खलन।
🔅चरम मौसम और ऑक्सीजन की कमी।
रहस्य अब भी पूरी तरह सुलझा नहीं है।

🚩रूपकुंड ट्रेक: रोमांच और अध्यात्म का संगम
🔅रूपकुंड आज भारत के सबसे लोकप्रिय हाई-एल्टीट्यूड ट्रेक्स में से एक है।
🔅मई के अंत से लेकर अक्टूबर तक का मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है।
🔅यात्रा में पर्वत, झरने, बुग्याल और बर्फीली ढलानों का ऐसा संगम मिलता है जो किसी पोस्टकार्ड से कम नहीं लगता।
🔅यह केवल एक ट्रेक नहीं, बल्कि हिमालय की गहराइयों में झांकने का अनुभव है — एक रहस्य और रोमांच से भरी यात्रा।

🚩निष्कर्ष: बर्फ में दबी कहानी
रूपकुंड झील हमें यह याद दिलाती है कि प्रकृति अपने भीतर कितनी कहानियाँ छिपाए हुए है — रहस्य, इतिहास और श्रद्धा का संगम। यह झील आज भी हिमालय की ऊँचाइयों में शांति से बहती है, अपने तल में मानवीय साहस और विनम्रता की अनकही गाथा संजोए हुए।
🏔️ रूपकुंड — जहाँ बर्फ बोलती है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं।

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