जायफल और जावित्री: एक ही वृक्ष से दो अनमोल मसालों की कहानी 

 

Nutmeg and Mace: एक फल, दो अनमोल मसाले

जायफल और जावित्री दोनों अत्यंत मूल्यवान मसाले हैं। ये एक ही वृक्ष ‘मिरिस्टिका फ्रैग्रैन्स’ से प्राप्त होते हैं। यह वृक्ष मूल रूप से इंडोनेशिया के मोलुकास द्वीपों का देशज है। हालांकि, आज यह चीन, मलेशिया, भारत और श्रीलंका में भी उगाया जाता है।

इसके अलावा, यह वृक्ष सदाबहार होता है। इसकी पत्तियों में प्राकृतिक सुगंध मौजूद रहती है। इसके फल छोटी नाशपाती के समान होते हैं। पकने पर फल दो हिस्सों में फट जाता है।

अंदर लाल या सिंदूरी रंग की जालीदार परत दिखाई देती है। इसे ही जावित्री कहते हैं। जावित्री के अंदर एक कठोर खोल होता है। इसके भीतर वास्तविक जायफल पाया जाता है। नया पौधा लगभग 7 से 8 वर्ष में फल देना शुरू करता है।

Cultivation of Nutmeg and Mace: कब और कैसे लगाएँ?

यदि आप Nutmeg and Mace का उत्पादन करना चाहते हैं, तो सही विधि जानना जरुरी है। इसके लिए सही समय का ज्ञान होना भी आवश्यक है।

उपयुक्त समय
जायफल का पौधा लगाने का सबसे अच्छा समय जून-जुलाई है। यह मानसून की शुरुआत का समय होता है। गर्म और नम जलवायु में यह वृक्ष तेजी से बढ़ता है।

बीज से पौधा तैयार करना
पके हुए फलों से ताज़ा बीज निकालें। बीज को अधिक देर न रखें। इसकी अंकुरण क्षमता जल्दी कम हो जाती है। इसलिए, बीज को छाया वाली जगह में बोएं। सामान्यतः 4 से 6 सप्ताह में अंकुरण शुरू हो जाता है।

कलम द्वारा पौधा तैयार करना
मादा पौधों की संख्या बढ़ाने के लिए कलम लगाई जाती है। वनस्पति उद्यानों में छोटे पौधों पर मादा वृक्ष की टहनी लगाई जाती है। इससे फल जल्दी आते हैं। साथ ही, उत्पादन में सुधार होता है। शुरुआत के 2 से 3 साल तक पौधे को गमले में उगाया जा सकता है।

मिट्टी, जगह और सिंचाई

  • जायफल के लिए हल्की और उपजाऊ मिट्टी सर्वोत्तम होती है।
  • मिट्टी में भरपूर जैविक खाद होनी चाहिए।
  • पौधे को हल्की छाया पसंद है। पर पूरी छाया में इसकी वृद्धि धीमी पड़ सकती है।
  • गर्मियों में नियमित हल्की सिंचाई दें।
  • मिट्टी को हमेशा नमीदार रखें, पर जलभराव न होने दें।
  • साल में दो बार गोबर खाद या नीम खली दें। इससे पौधे की वृद्धि बेहतर होती है।

Health Benefits of Nutmeg and Mace

जावित्री और जायफल दोनों के फायदे अलग-अलग होते हैं। दोनों एक ही फल से आते हैं। लेकिन इनका स्वभाव और प्रभाव अलग है। आयुर्वेद और मसालों की अधिक जानकारी के लिए आप Azaad Bharat की वेबसाइट देख सकते हैं।

जायफल (Nutmeg) के फायदे

जायफल बीज होता है। इसका प्रभाव थोड़ा गर्म और शांत करने वाला होता है। यह पाचन सुधारने वाला भी होता है।

  • पाचन के लिए श्रेष्ठ: यह पाचन को सामान्य करता है। गैस और पेट दर्द में राहत देता है।
  • नींद लाने में मदद: रात्रि में दूध में चुटकी भर जायफल लें। यह नींद सुधारने में उपयोगी है।
  • दर्द और सूजन में राहत: यह जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द में लाभ देता है।
  • तनाव और चिंता कम: यह दिमाग को शांत करता है।
  • त्वचा के लिए: इसके एंटीबैक्टीरियल गुण मुंहासे कम करते हैं।

जावित्री (Mace) के फायदे

जावित्री बीज के ऊपर की लाल झिल्ली है। इसका प्रभाव सुगंधित और पाचक होता है। यह रक्त-संचार बढ़ाने वाला भी होता है।

  • भूख बढ़ाने में: यह खाने में सुगंध देकर पाचन एंजाइम बढ़ाती है।
  • एंटीबैक्टीरियल गुण: यह संक्रमण और फंगल से लड़ने में सहायक है।
  • रक्त संचार में सुधार: इससे थकान और कमजोरी में लाभ मिलता है।
  • दर्द निवारक: जावित्री का तेल मांसपेशियों के दर्द में उपयोगी है।
  • महिलाओं के लिए: यह शरीर को गर्माहट देता है।
  • स्वाद और सुगंध: बिरयानी और सूप में इसका उपयोग होता है।

Nutmeg and Mace में मुख्य अंतर

जायफल और जावित्री भले ही एक ही फल से आते हैं, लेकिन दोनों अलग हैं। इनका स्वाद और औषधीय प्रभाव भिन्न होता है।

जायफल की विशेषता
जायफल एक कठोर बीज होता है। इसका स्वाद हल्का मीठा होता है। इसका प्रभाव अधिक गर्म माना जाता है। यह नींद सुधारने और तनाव कम करने में उपयोगी है। इसका प्रयोग मिठाइयों और दूध में किया जाता है। इसकी दैनिक मात्रा आधे से एक ग्राम पर्याप्त है।

जावित्री की विशेषता
दूसरी ओर, जावित्री बीज के बाहर की परत होती है। यह जायफल की तुलना में अधिक सुगंधित होती है। इसका स्वाद हल्का तीखा होता है। इसका प्रभाव रक्त संचार बढ़ाने में प्रमुख है। इसका उपयोग बिरयानी और मसालेदार व्यंजनों में अधिक होता है। इस प्रकार, भले ही दोनों एक ही वृक्ष से प्राप्त होते हैं, उनके गुण अलग हैं।