20 February 2026
🤺 छत्रपति शिवाजी महाराज – भारतीय नौसेना के जनक के रूप में उनकी ऐतिहासिक भूमिका
✴️छत्रपति शिवाजी महाराज को “भारतीय नौसेना के जनक” कहा जाना केवल सम्मानसूचक उपाधि नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सत्य पर आधारित है। सत्रहवीं शताब्दी में जब अधिकांश भारतीय शासक अपने राज्य की सुरक्षा केवल स्थल-सेना तक सीमित रखते थे, तब शिवाजी महाराज ने समुद्र की सामरिक और आर्थिक शक्ति को दूरदर्शिता के साथ समझा। उस समय पश्चिमी तट पर पुर्तगाली, डच और अंग्रेज शक्तियाँ अपने व्यापार और सैन्य प्रभाव को बढ़ा रही थीं। समुद्री मार्गों से होने वाला व्यापार राज्य की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा था, और यदि समुद्र असुरक्षित होता, तो तटीय नगरों और व्यापार पर सीधा संकट उत्पन्न होता। शिवाजी महाराज ने इसी वास्तविकता को पहचानकर समुद्री सुरक्षा को राज्य नीति का अनिवार्य अंग बनाया। उन्होंने संगठित और नियमित नौसैनिक बल की स्थापना की, जो उस समय भारतीय उपमहाद्वीप में एक क्रांतिकारी कदम था। जहाज़ों का निर्माण कराया गया, नाविकों को प्रशिक्षित किया गया और समुद्र में गश्त की व्यवस्था विकसित की गई। यह केवल समुद्री लुटेरों से रक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि विदेशी शक्तियों के प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति भी थी। शिवाजी महाराज का मानना था कि जिस राज्य का समुद्र सुरक्षित है, वही वास्तव में सशक्त और आत्मनिर्भर हो सकता है।
🏣सिंधुदुर्ग और विजयदुर्ग जैसे समुद्री किलों का निर्माण उनकी असाधारण रणनीतिक दृष्टि का जीवंत प्रमाण है। ये किले समुद्र के भीतर इस प्रकार निर्मित किए गए कि वे प्राकृतिक और कृत्रिम सुरक्षा का अद्भुत संयोजन प्रस्तुत करते हैं। इन किलों में युद्धपोतों के लिए सुरक्षित स्थान, तोपों की सटीक तैनाती और गुप्त प्रवेश मार्ग जैसी व्यवस्थाएँ थीं। समुद्र के मध्य स्थित इन दुर्गों ने पश्चिमी तट को एक सुदृढ़ ढाल प्रदान की। आज भी ये किले यह प्रमाणित करते हैं कि शिवाजी महाराज केवल भूमि-युद्ध के विशेषज्ञ नहीं थे, बल्कि समुद्री सामरिक नीति के भी अग्रदूत थे।
⛵उनकी नौसैनिक नीति ने कोंकण तट को सुरक्षा प्रदान की, जिससे स्थानीय व्यापार, मत्स्य-उद्योग और बंदरगाहों की गतिविधियाँ निर्बाध रूप से संचालित हो सकीं। समुद्री शक्ति को राज्य-व्यवस्था के केंद्र में लाकर उन्होंने यह सिद्ध किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा बहुआयामी होती है—भूमि, जल और जन-समर्थन, तीनों का समन्वय आवश्यक है। आधुनिक भारतीय नौसेना भी शिवाजी महाराज को समुद्री शक्ति के प्रेरणास्रोत के रूप में सम्मान देती है, क्योंकि उन्होंने सबसे पहले एक संगठित भारतीय नौसैनिक संरचना की नींव रखी।
✴️इस प्रकार, छत्रपति शिवाजी महाराज को भारतीय नौसेना का जनक कहना ऐतिहासिक दृष्टि से पूर्णतः उचित है। उनकी समुद्री दूरदर्शिता ने यह संदेश दिया कि सशक्त राष्ट्र वही है जो अपने तटों, व्यापार मार्गों और समुद्री सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम हो। उनका यह योगदान भारतीय इतिहास में अद्वितीय और प्रेरणादायी है।
🔺Follow on
🔺 Facebook :
https://www.facebook.com/share/19dXuEqkJL/
🔺Instagram:
http://instagram.com/AzaadBharatOrg
🔺 Twitter:
twitter.com/AzaadBharatOrg
🔺 Telegram:
https://t.me/azaaddbharat
🔺Pinterest: https://www.pinterest.com/azaadbharat/
#ChhatrapatiShivajiMaharaj
#ShivajiMaharaj
#IndianNavy
#MarathaEmpire
#IndianHistory
#Sindhudurg
#Vijaydurg
#Konkan
#ProudIndian
#JaiBhavani
#JaiShivaji
#HistoryFacts
#Bharat
